Monday, 14 December 2015

आज के लोग मंदिर और धर्मशालाओं में बैठकर भी न्यायपूर्ण फैसले नहीं करवा पाते ???और हमारे बुजुर्ग पेड़ के नीचे बैठकर भी.......

समाज और देश के अनछुए मुद्दों, से आप को परिचित करने का प्रयास .................. 19
 
 
जो समाज या देश किसी समस्या की जमीनी हकीकत को नकारकर चलता है, वो कभी भी ताकतवर नहीं बन सकता, ................. उसे हराना सबसे आसान है क्योकि वो अन्दर से खोखला है .......................
समाजहित और देशहित में, एक सवाल ,................... आप सभी के सुझाव और प्रतिक्रियाएं सादर आमंत्रित हैं ................
पहले हमारे बुजुर्ग पेड़ के नीचे बैठकर भी न्यायसंगत फैसले कर देते थे और आज के तथाकथित समाजसेवी, सरपंच/ सामाजिक प्रधान, मंदिर और धर्मशालाओं में बैठकर भी न्यायपूर्ण फैसले नहीं करवा पाते ..............??? आखिर क्या कारण हैं इन सबके पीछे ................???
क्योकि आज के इन तथाकथित समाजसेवी, सरपंच/ सामाजिक प्रधान, लोगो का नैतिक और चारित्रिक पतन हो चूका है इसलिए ये लोग अपनी कमजोरियां छुपाने के लिए मंदिर और धर्मशाला की आड़ लेते हैं . जबकि हकीकत यह है की ये ही लोग न्याय के सबसे बड़े दलाल हैं . अगर इनके स्वार्थ सिद्ध हो रहे हों तो आपके पक्ष में झूठी गवाही देने के लिए ट्रेक्टर भरकर लोग पहुँच जायेंगे . आपको बस इतना करना होता है कि इन लोगो के लिए दिन में खाने पिने का बढ़िया खाना, चाय नाश्ता और रात के लिए शराब और कबाब का बंदोबस्त करना होता है . देश के हर गली गावं मोहल्ले, महिला थाने, पुलिस थाने, कोर्ट में आप को शराफत, सच्चाई और ईमानदारी का भद्दा मजाक देखने को मिल जायेगा . और इनके माध्यम से होने वाले फैसलों में हुए, लेन देन का लगभग 50% हिस्सा तो दलाली में ही चला जाता है

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